आखिरी पल

SA Admin SA Admin Jul 10 0 Comments 13 Views

दो दिन पहले उनकी शादी की आठवीं सालगिरह थी, लेकिन हिरेन भूल गया और ऊपर से घर भी लेट आया। फिर तो कहना ही क्या? बहुत झग़डे थे दोनों उस दिन। गुस्सा ठंडा हो जाने पर हिरेन ने अपनी पत्नी को मनाने की कोशिश भी की, लेकिन मेडम तो मेडम होती है। मर्ज़ी चाहे माफ करें, न चाहे तो ना करें।

शादी के कुछ साल तक तो सब कुछ ठीक था, लेकिन धीरे धीरे प्यार की जगह कड़वाहट ने ले ली और रोमांस की झग़डे ने। अब तो एक दूसरे के प्रति सम्मान के बीच में उनका स्वाभिमान आने लगा था। एक समय था जब दोनों को लगता था कि वें एक-दूसरे के बिना जी नही पाएंगे। मगर आज वहीं दो प्रेमी एक ही छत के नीचे अजनबियों की तरह जी रहे थे।

“आखिर कोई अपनी मैरिज एनिवर्सरी कैसे भूल सकता हैं? वह मुझे अब पहले जितना प्यार नहीं करता।” सोफे पर बैठी त्रिवेणी के मन में ख्याल आया। वह अपने पति से इतनी नाराज थी कि पिछले दो दिन से उससे ठीक से बात भी नही कर रही थी।

तभी दरवाज़े की घंटी बजी, उसने जाकर दरवाज़ा खोला, सामने बारिश में भीगा हुआ हिरेन खड़ा था। हाथों में फूलों का गुलदस्ता था और चेहरे पे मुस्कान।

लेकिन त्रिवेणी अभी भी माफ़ करने के मूड में नही थी। उसने गुलदस्ते को नीचे फेंक दिया और फिर से झगड़ने लगी- “तुम्हें क्या लगता हैं, इस तरह से मुझे गुलदस्ता देने से मैं बात को भूल जाऊंगी? अगर सच में प्यार करते हो तो दिखाओ, इस तरह से झूठ-मुठ का नाटक मत करों।”

हिरेन कुछ बोलता उससे पहले घर के अंदर से मोबाइल की घंटी बजने की आवाज़ सुनाई दी। त्रिवेणी ने अंदर जा कर फोन अपने हाथ में लिया और कॉल करने वाले का नंबर देखा। उसे थोड़ा सा आश्चर्य हुआ, वह कॉल हिरेन ने ही कि थी।

लेकिन जब उसने फोन उठाया तो दूसरी तरफ किसी अनजान मर्द की आवाज़ सुनाई दी, “हैलो, मैं गुड़गाँव पुलिस स्टेशन से सब इंस्पेक्टर विजयसिंघ राठौड़ बात कर रहा हूं। क्या यह हिरेन शर्मा के घर का नंबर है?”

“जी हाँ, क्या कोई प्रॉब्लम है?”

“मुझे खेद है, लेकिन एक दुर्घटना हुई है जिसमें एक आदमी की मृत्यु हो गई हैं। हमें उसकी जेब से एक वॉलेट और एक मोबाइल फोन मिला हैं। जिसमें आपका नंबर Home के नाम से सेव किया गया है; हमें उसके शरीर की पहचान करने के लिए किसी की आवश्यकता हैं, क्या आप अभी सिविल हॉस्पिटल आ सकती हैं?”

त्रिवेणी का दिल बैठ गया! वह आचंभित थी। उसने कहा “लेकिन मेरे पति तो यहाँ घर पर हैं, मेरे साथ।”

“क्षमा करें महोदया, लेकिन यह घटना दो घंटे पहले ही हुई, जब वह रेलवे स्टेशन से बाहर निकल रहे थे।”

त्रिवेणी  अपना होश खोने लगी थी। यह कैसे हो सकता हैं? उसने पहले किसी से सुना था कि कभी कभी आत्माएं इस दुनिया को छोड़ने से पहले अपने प्रियजन से मिलने आती है।

अपनी आंखों में आँसू के साथ वह भागती हुई हॉल में पहुंची। हिरेन वहां नहीं था। पुलिस वाला सही कह रहा था। अब उसे पछतावा हो रहा था। हिरेन मरने के बाद भी आख़िरी बार उसे मनाने आया था। लेकिन उसने गुस्से में आकर उसके साथ घटिया क़िस्म का बर्ताव किया ।

“कितनी झल्ली हूं मैं?” वह रोती हुई फर्श पर बैठ गई, उसने अपना मौका खो दिया था, हमेशा के लिए।

उसे पुराने दिनों की घटनाएँ याद आने लगी। वो शादी से पहले की romantic Love Story और  हिरेन का थिएटर के अंदर सबके सामने शादी के लिए प्रपोज़ करना, आधी रात को उसके लिए अपने हाथों से मैगी बनाना और अपनी बेसुरी आवाज़ में अर्जित सिंह के गाने गाना। मानो सब कुछ उसकी आँखों के सामने हो रहा था।

त्रिवेणी ने अपनी आँखें बंद कर ली और भगवान से प्रार्थना करने लगी- “हे भगवान, बस एक बार मिला दो मुझे उससे, ताकि उसे बता सकूँ की मैं उससे कितना प्यार करती हूं।”

तभी अचानक बाथरूम में से आहट सुनाई दी, दरवाज़ा खुला, हिरेन बाहर आया और बोला, “स्वीटहार्ट, मैं तुम्हें बताना भूल गया कि,आज शाम को ट्रेन में आते वक़्त मेरा वॉलेट और मोबाइल चोरी हो गया हैं।”

त्रिवेणी दौड़ती हुई उसके पास गई और गले लिपट गई।