ज़रा नजरिया बदल कर तो देखिये !

SA Admin SA Admin Jul 10 0 Comments 15 Views

एक व्यक्ति अँधेरे कमरे में उदास बैठा हुआ था. उसने एक डायरी निकाली, पेन उठाया और अपनी डायरी में लिखना शुरू किया:

“इस साल मेरा पैरो का ऑपरेशन हुआ, काफी खर्चा हुआ था और पूरे 2 महीने तक मैं बिस्तर से उठ ना सका”

“मेरी उम्र अब 65 साल की हो गयी है, बूढा हो गया हूँ पता नहीं और कितना जी पाउँगा।”

“इस साल पिता जी भी स्वर्ग सिधार गए”

“इस साल बेटे का कार एक्सीडेंट भी हुआ था, कितनी चोटें आयी थी मेरे बेटे को और कार की भी हालत बिलकुल खराब हो गयी थी. कार की मुरम्मत करवाने में काफी खर्चा भी हुआ था”

अंत में उस व्यक्ति ने लिखा:

” यकीनन…. ये साल मेरे लिए बहुत खराब गया…. “

ये लिख कर वो व्यक्ति कमरे से बाहर चला गया और इतने में उसकी पत्नी आ गयी. तभी पत्नी की नज़र अचानक उस खुली डायरी पर पड़ी और उसमे जो लिखा था वो पढ़ लिया। पत्नी ने जल्दी से पेन उठाया और कुछ लिखना शुरू कर दिया. लिख कर पत्नी कमरे से बाहर चले गयी और इतने में वो व्यक्ति भी कमरे के अंदर दाखिल हुआ.

उदासी भरी आँखों से उसने फिर पेन उठाया लेकिन ये क्या….

उस डायरी में उसने जो लिखा था उसकी बजाय कुछ और ही लिखा हुआ था, उसने पढ़ा:

“शुक्र है इस साल पैरो का ऑपरेशन हो गया, इतने सालो से दर्द सह रहा था आर्थराइटिस का “

“मेरी उम्र अब 65 साल की हो गयी है, और भगवान् की कृपा है कि मैं अभी भी बिलकुल स्वस्थ हूँ। “

“इस साल पिता जी भी स्वर्ग सिधार गए, शुक्र है कि 90 साल की उम्र में भी उन्हें कोई बड़ी बीमारी नहीं हुई, जितनी देर रहे कभी उन्हें किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ा.”

“इस साल बेटे का कार एक्सीडेंट भी हुआ था, लेकिन शुक्र है मेरे बेटे को कुछ नहीं हुआ. कार का क्या है, कम से कम बेटा तो सुरक्षित है “

अंत में उस व्यक्ति की पत्नी ने लिखा था :

” वाकई में, इस साल भगवान ने हम पर अपनी कृपा बनाई रखी और मुझे विश्वास है कि भोलेनाथ आगे भी मेरे सब काम बनाते रहेंगे”  

इतने पॉजिटिव और प्रेरित अल्फ़ाज़ पढ़कर उस व्यक्ति को बहुत ख़ुशी हुई और उसे एहसास हो गया कि वाकई में ये साल अच्छा गुज़रा और उस दिन से ज़िन्दगी को देखने का उसका नजरिया बदल गया.